पुराण विषय अनुक्रमणिका(अ-अनन्त) Purana Subject Index

Atri - Adhokshaja अत्रि - अधोक्षज

Puraanic contexts of words like Atri, Atharvaa, Aditi,  Advaita, Adbhuta, Adharma etc. are given here

अत्रि कूर्म १.२०.४१( अत्रि द्वारा राजा वसुमना को मुक्ति के उपाय का कथन ), गरुड ३.७.५१(अत्रि द्वारा हरि-स्तुति), ३.१५.१३(अत्रि द्वारा अलर्क को आन्वीक्षिकी विद्या देने का कथन), देवीभागवत १.३.३१( १९वें द्वापर में व्यास ), नारद १.६६.११५( अत्रीश की शक्ति योगिनी का उल्लेख ), ब्रह्म २.७४( अत्रि - पुत्री आत्रेयी की कथा ), पद्म १.१९.२३७( हेमपूर्ण उदुम्बर प्राप्ति पर अत्रि की प्रतिक्रिया ), १.३४.१५( ब्रह्मा के यज्ञ में सुब्रह्मण्य ), ५.१०( राम के अश्वमेध में दक्षिण द्वार पर स्थिति ), ब्रह्मवैवर्त्त १.८.२४( अत्रि की ब्रह्मा के दक्षिण नेत्र से उत्पत्ति ), १.२२.१५( अत्रि शब्द की निरुक्ति ), ब्रह्माण्ड १.१.५.७५( अत्रि का ब्रह्मा के श्रोत्र से प्राकट्य ), २.३.८.७३( अत्रि वंश का वर्णन ), २.३.६५.१( तपोरत अत्रि के नेत्रों से सोम का स्रवण, सोम की जगत में प्रतिष्ठा का वर्णन), ३.४.४४.५३( लिपि न्यास प्रसंग में एक व्यञ्जन के देवता ), भविष्य ३.४.१७.६७( अत्रि द्वारा त्रिदेवों की पुत्र रूप में प्राप्ति की कथा, सोम, रुद्र व विष्णु का षष्ठम, सप्तम व  अष्टम वसु बनना), ३.४.२१.१४( कलियुग में कण्व - पौत्रों के रूप में १६ गोत्रों में एक), भागवत ३.१२.२४( ब्रह्मा की अक्षियों से अत्रि की उत्पत्ति का उल्लेख ), ४.१.१५( अत्रि द्वारा ऋक्ष पर्वत पर तप, त्रिदेवों से तीन पुत्रों  की प्राप्ति ), ४.१९.१२( पृथु के अश्वमेध यज्ञ में आचार्य, अश्व प्राप्ति का उद्योग, पृथु को इन्द्रहनन के लिए प्रेरित करना ), मत्स्य २३.२( अत्रि द्वारा तप, तेज से चन्द्रमा की उत्पत्ति ), २३.२०( चन्द्रमा के राजसूय में होता ), ११८+ ( अत्रि के आश्रम का वर्णन, पुरूरवा का आगमन व तप ), १९७( अत्रि वंश व गोत्र का वर्णन ), मार्कण्डेय १७( अत्रि द्वारा सोम आदि ३ पुत्रों का जनन ), लिङ्ग १.२४.५६( १२वें द्वापर में मुनि ), १.६३.६८( अत्रि की १० पत्नियों के नाम, प्रभकर उपनाम प्राप्ति का कारण ), वायु ३४.६२( अत्रि द्वारा कमल की मेरु कर्णिका को शताश्रि रूप मानना ), ६५.४५/२.४.४५( ब्रह्मा के शुक्र की आहुति से अत्रि की उत्पत्ति, अत्रि नाम के कारण का कथन ), ७०.६७/२.९.६७( अत्रि की भद्रा आदि १० पत्नियों के नाम, वंश का वर्णन ), ९०/२.२८( अत्रि के तपोद्भूत तेज के नेत्रों से स्रवण से सोम की उत्पत्ति की कथा ), विष्णु १.११.४४( अत्रि द्वारा ध्रुव को परमपद प्राप्ति के उपाय का कथन ), विष्णुधर्मोत्तर १.२५( अत्रि के दुर्वासा आदि पुत्र ), १.११३( गोत्रकार अत्रि ), १.१५१( पुरूरवा द्वारा अत्रि के आश्रम के दर्शन ), १.१५४( अत्रि द्वारा पुरूरवा को दर्शन ), शिव ३.५.६( १२वें द्वापर में शिव का अत्रि रूप में जन्म ), ३.१९( अत्रि द्वारा दुर्वासा आदि तीन पुत्रों की प्राप्ति ), ४.३( अत्रि द्वारा अनावृष्टि में तप ), ७.१.१७.३०( अत्रि व अनसूया के सत्यनेत्र आदि ५ पुत्रों व श्रुति कन्या के नाम ), ७.२.४.५२( त्रिनेत्र शिव का रूप ), स्कन्द १.२.५२.१७( कोटि तीर्थ में अत्रि द्वारा अत्रीश्वर लिङ्ग की स्थापना ), ३.१.४९.६७( अत्रि द्वारा रामेश्वर की स्तुति ), ३.२.२३.१०( ब्रह्मा के सत्र में होता ), ४.१.१८.१६( अत्रि द्वारा स्थापित अत्रीश्वर लिङ्ग का संक्षिप्त माहात्म्य ), ४.१.१९.११०( अत्रि द्वारा ध्रुव को परमपदप्राप्ति हेतु गोविन्द की आराधना का निर्देश ), ४.२.९७.१२( मधु-कैटभ द्वारा पूजित अत्रीश्वर लिङ्ग का संक्षिप्त माहात्म्य ), ५.१.२४( अत्रि द्वारा बोध से दुष्ट चरित्र वाले अग्निशर्मा का वाल्मीकि बनना ), ५.१.२८.५२( अत्रि के तपोजनित तेज से सोम की उत्पत्ति का वर्णन ), ५.१.२८.७७( चन्द्रमा के राजसूय यज्ञ में होता ), ५.१.६३.२४१( बलि के अश्वमेध में अत्रि के अध्वर्यु बनने का उल्लेख ), ५.३.१०३( एरण्डी सङ्गम का माहात्म्य : अत्रि व अनसूया द्वारा त्रिदेवों की पुत्र रूप में प्राप्ति ),  ६.५.८( त्रिशङ्कु के यज्ञ में नेष्टा ), ६.३२.३४, ७६( हेमपूर्ण उदुम्बर प्राप्ति पर अत्रि की प्रतिक्रिया ), ६.१८०.३३( ब्रह्मा के यज्ञ में प्रस्थाता ), ७.१.२०.३८( अत्रि की १० भार्याओं व पुत्रों के नाम, भद्रा पत्नी से सोम का जन्म, स्व तप से उत्पन्न तेज से सोम का जन्म ), ७.१.२५५.२०, ५७( हेमपूर्ण उदुम्बर प्राप्ति व बिस चोरी पर अत्रि की प्रतिक्रिया ), ७.४.१४.४७(अत्रि के लिए लक्ष्मणा नदी), हरिवंश १.२५( अत्रि द्वारा तप, तेज से सोम की उत्पत्ति का प्रसंग ), लक्ष्मीनारायण १.७९( अत्रि के तप से उत्पन्न तेज से सोम की उत्पत्ति ), १.४८३( अत्रि द्वारा त्रिदेवों की पुत्र रूप में प्राप्ति की कथा ) atri

Remarks on Atri

अथर्व मार्कण्डेय ६३.३९/६०.३९(आयुर्वेदाचार्य ब्रह्ममित्र द्वारा अथर्ववेद के १३वें काण्ड पर अधिकार रखने का उल्लेख), स्कन्द ४.१.३१.२७( अथर्व द्वारा शिव स्तुति का कथन ), ४.२.९२( सरस्वती के अथर्ववेद का रूप होने का उल्लेख ), ६.२०२(भर्तृयज्ञ - प्रोक्त अथर्ववेद की महिमा), हरिवंश ३.१७.४७(अव्यक्त की मूर्द्धा से अथर्ववेद की उत्पत्ति का उल्लेख), atharva

अथर्वा ब्रह्माण्ड १.२.१२.९( लौकिक अग्नि अथर्वा द्वारा दध्यङ्ग अथर्वण नाम प्राप्ति के कारण का कथन ), भागवत ३.२४.२४( अथर्वा ऋषि का कर्दम - पुत्री शान्ति से विवाह ), ४.१.४१( चित्ति - पति, दध्यङ्ग/अश्वशिरा पुत्र की प्राप्ति ), वायु २९.८( लौकिक अग्नि अथर्वा द्वारा दध्यङ्ग अथर्वण नाम प्राप्ति का कारण ), लक्ष्मीनारायण ३.३२.१०( अमतृ, दध्यङ्ग आदि चार अथर्वा - पुत्रों के नाम ) atharvaa 

अदिति अग्नि ३४८.३( अदिति हेतु ऋ एकाक्षर का प्रयोग ), गर्ग १.५.२३( अदिति के देवकी रूप में अवतरण का उल्लेख ), देवीभागवत ४.२.४२( कश्यप - पत्नी अदिति का दिति के शाप से वसुदेव - पत्नी देवकी बनना, वरुण के शाप से मृतवत्सा होना ), नारद १.१०+ ( अदिति द्वारा पुत्रों के कल्याण हेतु तप, विष्णु की स्तुति, वामन पुत्र की प्राप्ति ), पद्म २.५.७०( अदिति द्वारा पुत्र प्राप्ति हेतु तप, सुव्रत विप्र का वसुदत्त इन्द्र रूप में जन्म ), ब्रह्म १.३०( सूर्य - संज्ञा - छाया आख्यान में अदिति से मार्तण्ड पुत्र की उत्पत्ति ), १.९३+ ( अदिति द्वारा पृथिवी/नरक से कुण्डलों की प्राप्ति, कृष्ण - स्तुति ), ब्रह्मवैवर्त्त ४.९( अदिति द्वारा कद्रू को शाप, अदिति का देवकी रूप में अवतरण ), ४.४५( शिव विवाह में अदिति द्वारा हास्योक्ति ), ब्रह्माण्ड २.३.७.४६५( अदिति की धर्मशीला प्रकृति का उल्लेख ), भागवत २.३( अन्न प्राप्ति की कामना पूर्ति हेतु अदिति की उपासना का निर्देश ), ८.१६( कश्यप द्वारा अदिति को पयोव्रत का उपदेश ), मार्कण्डेय १०४+/१०१+ ( सूर्य को पुत्र रूप में प्राप्त करने के लिए अदिति द्वारा सूर्य की स्तुति, सूर्य का मार्तण्ड रूप में जन्म ), वामन २८+ ( कश्यप - पत्नी, पुत्र निमित्त तप, वामन पुत्र की प्राप्ति ), ७६( सूर्य पुत्र प्राप्ति हेतु अदिति द्वारा तप ), विष्णु ४.१.६( दक्ष - पुत्री, विवस्वान् - माता ), ५.३०.६( कुण्डलों की प्राप्ति पर अदिति द्वारा कृष्ण की स्तुति ), विष्णुधर्मोत्तर ३.७३( मूर्ति निर्माण के संदर्भ में अदिति के स्वरूप का कथन ), स्कन्द ४.२.८९.४५( दक्ष यज्ञ में अदिति के ओष्ठ पुट का छेदन ), हरिवंश २.६४.५६( नरकासुर द्वारा हरण किए गए कुण्डलों की अदिति द्वारा पुन: प्राप्ति ), लक्ष्मीनारायण २.३२.३२( रेवती गृह का नाम? ), ३.९५( प्रणद्ब्रह्म साधु द्वारा अदिति की सेवा से संतुष्ट होकर देवमाता बनने का वर ), कथासरित् ८.२.४११( अदिति द्वारा इन्द्र को मय को प्रसन्न करने का निर्देश ), कृष्णोपनिषद २१( अदिति रज्जु, कश्यप उलूखल ) द्र. वास्तु ( मण्डल ) aditi 

अदृश्य स्कन्द ५.२.११.२३( अनूरु/अरुण द्वारा सिद्धेश्वर लिङ्ग के प्रभाव से अदृश्यकरण प्राप्ति का उल्लेख ) adrishya 

अदृश्यन्ती लिङ्ग १.६४.१०( रुधिर/कल्माषपाद राक्षस द्वारा शक्ति के भक्षण पर अदृश्यन्ती का विलाप व पराशर को जन्म देना ), वायु २.९२( अदृश्यन्ती द्वारा नैमिष क्षेत्र में पराशर को जन्म देना, नैमिष क्षेत्र की महिमा प्रसंग ), ७०.८३( शक्ति मुनि की पत्नी, पराशर - माता ), लक्ष्मीनारायण १.३८७( कल्माषपाद द्वारा सुश्रुता - पति वेदश्रवा के भक्षण का वृत्तान्त ), १.४१०( कल्माषपाद राक्षस द्वारा शक्ति के भक्षण पर अदृश्यन्ती द्वारा काल, रुद्र, यम व विश्वामित्र को शाप देकर राक्षस व शिला बनाना, शक्ति आदि के सूक्ष्म रूप में जीवित होने पर अदृश्यन्ती द्वारा विश्वामित्र आदि को भी सूक्ष्म रूप में जीवित करना ) adrishyantee

अद्भुत ब्रह्माण्ड ३.४.१.६१( इन्द्र का नाम ), भागवत ८.१३.१९( नवें मन्वन्तर के इन्द्र का नाम ), मत्स्य ५१.३६( दहन अग्नि - पुत्र, देवलोक में हव्य का भक्षण, वीर - पिता ), २२८( अद्भुत या उत्पात शान्ति ), महाभारत वन २२४.२८+ ( सह अग्नि व मुदिता - पुत्र अद्भुत नामक अग्नि की गृहपति नाम से प्रतिष्ठा, अद्भुत द्वारा आहवनीय अग्नि में हुत आहुति को देवताओं तक पहुंचाना, अद्भुत अग्नि की सप्तर्षि - पत्नियों पर आसक्ति, समागम से स्कन्द कार्तिकेय के जन्म का विस्तृत वर्णन ), लक्ष्मीनारायण ३.३२.२१( सवन - पुत्र, विविधि - पिता ), ३.१६४.५६( नवें मन्वन्तर में इन्द्र ) द्र. उत्पात, अपशकुन आदि adbhuta 

अद्रि गर्ग ६.२.१३(श्यामलाद्रि पर मुचुकुन्द के शयन व कालयवन को भस्म करने की कथा), ब्रह्म २.१४( अद्रिका व निर्ऋति - पुत्र अद्रि को गौतमी में स्नान से पिशाचत्व से मुक्ति ), मार्कण्डेय ६९( बलाक राक्षस का पिता ), लक्ष्मीनारायण २.५७.७४( अद्रिमालय नामक यमदूत द्वारा इलाक दैत्य का वध ) द्र. आjर्द्र adri 
Comments on Adri

अद्रिका देवीभागवत २.१( अद्रिका अप्सरा का ब्राह्मण के शाप से मीन बनना, उपरिचर वसु के वीर्य से सत्यवती के जन्म की कथा ), ब्रह्म २.१४( हनुमान द्वारा निर्ऋति - भार्या अद्रिका मार्जारी को गौतमी में स्नान कराना, अद्रिका के पिशाच पुत्र का वृत्तान्त ), वायु ७३.२२/२.११.६४( अप्सरा, ब्राह्मण शाप से मीन बनना, उपरिचर वसु के वीर्य से सत्यवती के जन्म की कथा ), हरिवंश १.१८.३०( अद्रिका अप्सरा के संग बैठे अमावसु पर अच्छोदा की आसक्ति, अमावसु के शाप से अद्रिका मत्स्य से सत्यवती रूप में जन्म ) adrikaa 
Comments on Adrikaa

अद्रोहक पद्म १.५०.९७(  अद्रोहक गृहस्थ द्वारा राजकुमार की सुन्दर स्त्री की रक्षा )

अद्वैत भागवत ७.१५.६२( अद्वैत के तीन प्रकार ), ११.२८( द्वैत से अद्वैत प्राप्ति ), लिङ्ग १.७५( शिव अद्वैत का वर्णन ), विष्णु २.१५( ऋभु द्वारा  निदाघ को अद्वैत की शिक्षा ), योगवासिष्ठ ६.१.९५.१२( कार्य - कारण के अभाव का नाम अद्वैत ), ६.२.५४( अद्वैत एक्य प्रतिपादन नामक सर्ग ), स्कन्द ३.१.३०.११९(अद्वैत विज्ञान के बिना भी सायुज्य प्राप्ति के उपाय का कथन), ३.१.४९.५८(बृहस्पति द्वारा अद्वैत रूप में रामेश्वर की स्तुति), ३.१.४९.५९( शुक्र द्वारा द्वैतहीन रूप में रामेश्वर की स्तुति), लक्ष्मीनारायण २.९२( विशिष्ट अद्वैत का निरूपण ), ४.२५.७५( विशिष्ट अद्वैत का निरूपण ) advaita 

अधर्म अग्नि २०.१८( हिंसा - पति, निकृति व अनृत - पिता ), ब्रह्मवैवर्त्त २.१.११६( मिथ्या - पति ), ब्रह्माण्ड ३.४.१३.१३( ललिता देवी के आयुधों का रूप ), भागवत ४.८.२( अधर्म की ब्रह्मा से उत्पत्ति, मृषा - पति, दम्भ व माया - पिता ), ६.१.४३( ब्रह्माण्ड के साक्षियों सूर्य, अग्नि द्वारा देहधारियों के अधर्म का ज्ञान होने का कथन ), ७.१५.१२( अधर्म की पांच शाखाएं ), मत्स्य १६५( चार युगों में धर्म व अधर्म की पाद संख्याओं का कथन ), मार्कण्डेय ५०.२९( हिंसा - पति, अनृत व निर्ऋति - पिता, अधर्म के वंश का वर्णन ), वराह ३१.१६(अधर्मराज घातार्थ गदा का उल्लेख),  वायु १०.३९( हिंसा - पति, निकृति व अनृत - पिता ), शिव १.१७.८४( अधर्म रूप महिष का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.१४( ब्रह्मा से अधर्म की सृष्टि का कथन ), १.४१२( ब्रह्मा - पुत्र, दुःखह - पिता, अधर्म के परिवार का वर्णन ), २.८७( अधर्मजीव : खर राक्षस - पुत्र, दुष्ट प्रकृति, विभीषण द्वारा प्रबोधना की चेष्टा, भैरव द्वारा वध आदि ), ३.१५२.२२( अधर्म के परिवार का वर्णन ) adharma

अधिकसङ्गमा कथासरित् ७.८.५५( परित्यागसेन - भार्या, इन्दीवरसेन व अनिच्छासेन पुत्रों का वृत्तान्त ) 

अधिपति अग्नि १९.२३, २०९.४०( विभिन्न द्रव्यों के अधिपति/देवता ), पद्म १.७, २.२७, ब्रह्म १.६६, ब्रह्मवैवर्त्त ४.७३, ब्रह्माण्ड ३.८.१, भागवत ११.१६( प्राणियों में अधिपति ), मत्स्य ८( सर्गों के अधिपति ), लिङ्ग १.५८, वायु ६५.८७/२.४.८७( भृगु के १२ पुत्रों में से एक ), ७०.१/२.९.१, विष्णु १.२२.१, विष्णुधर्मोत्तर १.५६( जगत विभूतियां ), १.२४९, हरिवंश १.४( ब्रह्मा द्वारा अधिपतियों की प्रतिष्ठा ), ३.३७( विभिन्न वर्गों के अधिपति ) adhipati 

अधिभूत लक्ष्मीनारायण ३.१७७( आकाश, वायु आदि भूतों के अधिभूत, अधिदैव व अध्यात्म का कथन ),  

अधिमास अग्नि २१४.१६( अधिमास के विजृम्भिका का रूप होने का उल्लेख ), द्र. पुरुषोत्तम, सङ्क्रान्ति 

अधिरथ ब्रह्मवैवर्त्त २.६१.१०१( चैत्र - पुत्र ), भागवत ९.२३.१२( सत्कर्मा - पुत्र, कर्ण - पिता, अङ्ग वंश ), मत्स्य ४८.१०८( सत्यकर्मा - पुत्र, बृहद्रथ - पौत्र, कर्ण - पिता ) adhiratha

अधिरम्या पद्म ५.६७.४०( नीलरत्न - पत्नी ) 

अधिवासन अग्नि ५७( कुम्भ - अधिवासन/प्रतिष्ठा विधि ), ५९( श्रीहरि के अधिवासन/साद्रिटध्यकरण की विधि : हरिन्यास ), ९६( प्रतिमा अधिवासन विधि ), भविष्य १.१३६( सूर्य प्रतिमा का अधिवासन ), २.२.१७( देव प्रतिष्ठा से पूर्व अधिवासन कर्म ), विष्णुधर्मोत्तर ३.१.१( प्रतिमा अधिवासन विधि ), स्कन्द ५.३.१५९.८०( वैतरणी रूपी गौ के अधिवासन मन्त्र का कथन ), लक्ष्मीनारायण २.१५८.६१( अधिवासन कर्म में प्रासाद के अवयवों/अङ्गों की शरीर के रूप में कल्पना ) adhivaasana

अधिष्ठान योगवासिष्ठ ४.३२.११( काश्मीर मण्डल में नगर का नाम ) 

अधोक्षज अग्नि ४८.९( अधोक्षज की मूर्ति के आयुधों का कथन ), भागवत ९.११.५४( राम का एक नाम ), स्कन्द २.२.१२.६५( अधोक्षज विष्णु का शिव के समक्ष प्राकट्य, सुदर्शन चक्र द्वारा काशिराज के वध का प्रसंग ), महाभारत शान्ति ३४२.८३( प्राहवंश में अधोक्षज नाम से पुकारे जाने के कारण अधोक्षज नाम की सार्थकता का उल्लेख ), लक्ष्मीनारायण १.२५०.७( ज्येष्ठ कृष्ण अपरा एकादशी के अधिपति अधोक्षज की पूजा ), १.२६५.१३( अधोक्षज की शक्ति त्रयी? का उल्लेख ), २.२६९.३३( अभयाक्ष राजा का उपनाम व अधोक्षज तीर्थ : अधोक्षज तीर्थ में स्नान की महिमा ), ४.२६.५२( अधोक्षज द्वारा मृत्यु से रक्षा ) adhokshaja